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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 15 / 120

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जाट कहै सुण देवजी, सत्य कहो छौ बात।

झूठ कपट की वासना, दूर करो निज तात।

शब्द 15

ओ३म् सुरमां लेणां झीणा शब्दूं, म्हे भूल न भाख्या थूलूं।

सो पति बिरखा सींच प्राणी, जिहिं का मीठा मूल स मूलूं।

पाते भूला मूल न खोजो, सींचो कांय कु मूलूं।

विष्णु विष्णु भण अजर जरीजै, यह जीवन का मूलूं।

खोज प्राणी ऐसा विनाणी, केवल ज्ञानी, ज्ञान गहीरूं, जिहिं कै गुणै न लाभत छेहूं।

गुरु गेवर गरवां शीतल नीरूं, मेवा ही अति मेऊं।

हिरदै मुक्ता कमल संतोषी, टेवा ही अति टेऊ।

चड़कर बोहिता भवजल पार लंघावै, सो गुरु खेवट खेवा खेहूं।