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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 26 / 120

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साथरियां बैठे जहाँ, वैरागी चले जो जाह।

महंत जमात पुष्ट अति, विश्नोई सराहै तांह।

शब्द 26

ओ३म् घण तण जीम्या को गुण नांही, मल भरिया भण्डारूं। आगे पीछे माटी झूलै, भूला बहैज भारूं।

घणा दिनां का बड़ा न कहिबा, बड़ा न लंघिबा पारूं। उत्तम कुली का उत्तम न होयबा, कारण किरिया सारूं।

गोरख दीठा सिद्ध न होयबा, पोह उतरबा पारूं।

कलयुग बरतै चेतो लोई, चेतो चेतण हारूं।

सतगुरु मिलियो सतपन्थ बतायो, भ्रान्त चुकाई, विदगा रातै उदगा गारूं।