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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 25 / 120

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एक समै देव पै, आयो महमद खान।

हस्ती घोड़ा अति घणा, मन में बहुत गुमान।

शब्द 25

ओ३म् राज न भूलीलो राजेन्द्र, दुनी न बंधै मेरूं। पवणा झोलै बिखर जैला, धुंवर तणा जै लोरूं।

वोलस आभै तणा लहलोरूं, आडा डंबर केती बार बिलंबण, यो संसार अनेहूं।

भूला प्राणी विष्णु न जंप्यो, मरण विसारो केहूं।

म्हां देखंता देव दाणूं, सुरनर खीणां, जंबू मंझे राचि न रहिबा थेहूं।

नदिये नीर न छीलर पाणी, धूंवर तणां जे मेहूं।

हंस उडाणों पन्थ विलंब्यो, आसा सास निरास भईलो।

ताछै होयसी रंड निरंडी देहूं, पवणा झोलै बिखर जैला गैण विलंबी खेहूं।