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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 28 / 120

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शेख मनोहर यों कह्यो, रूह का कैसा वरण।

जम्भेश्वर शब्द उच्चार यों, परम तत्व अवरण।

शब्द 28

ओ३म् मच्छी मच्छ फिरै जल भीतर, तिहि का माघ न जोयबा।

परम तत्व है ऐसा, आछै उरवार न ताछै पारूं।

ओवड़ छोवड़ कोई न थीयों, तिहिं का अन्त लहिबा कैसा।

ऐसा लो भल ऐसा लो, भल कहो न कहा गहीरूं।

परम तत्व के रूप न रेखा, लीक न लेहूं खोज न खेहूं। वरण विवरजत भावै खोजो बावन बीरूं।

मीन का पंथ मीन ही जाणै, नीर सुरंगम रहीयूं। सिध का पन्थ कोई साधु जाणत, बीजा बरतन बहियों।