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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 48 / 120

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लोहा पांगल परचियों, जटा दई उतराय।

मन में यहै नहचो भयो, गुरु कर परसै पाय।

शब्द 48

ओ३म् लक्ष्मण लक्ष्मण न कर आयसां, म्हारे साधां पड़ै बिराऊं। लक्ष्मण सो जिन लंका लीवी, रावण मार्यो ऐसो कियो संग्रामूं।

लक्ष्मण तीन भवन का राजा, तेरे एक न गाऊं। लक्ष्मण के तो लख चौरासी जीया जूणी, तेरे एक न जीऊं।

लक्ष्मण तो गुणवंतो जोगी, तेरे बाद विराऊं। लक्ष्मण का तो लक्षण नांही, शीस किसी विध नाऊं।