मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह
शब्द 47 / 120

छपय

लोहा पांगल यूं कहै, जाम्भेजी सूं भेव।

जोग कछोटी हम लई, सुणिये पूर्ण देव।

शब्द 47

ओ३म् काया कंथा मन जो गूंटो, सीगी सास उसासूं। मन मृग राखले कर कृषाणी, यूं म्हे भया उदासूं।

हम ही जोगी हम ही जती, हम ही सती, हम ही राखबा चीतूं। पंच पटण नव थानक साधले, आद नाथ के भक्तूं।