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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 50 / 120

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जोगी कहै सुण देवजी, बाला लक्ष्मण योग अपार।

मुख नहीं देखे त्रियां को, बचै नेक प्रकार।

शब्द 50

ओ३म् तइयां सासूं तइया मासूं, तइया देह दमोई। उत्तम मध्यम क्यूं जाणिजै, बिबरस देखो लोई।

जाकै बाद विराम बिरासों, सरसा भेला चालै, ताकै भीतर छोत लकोई।

जाकै बाद विराम बिरासों सांसो, सरसा भोलो भागो, ताकै मूले छोत न होई।

दिल दिल आप खुदायबन्द जाग्यो, सब दिल जाग्यो सोई। जो जिंदो हज काबै जाग्यो, थल सिर जाग्यो सोई।

नाम विष्णु के मुसकल घातै, ते काफर सैतानी।

हिन्दू होय कर तीरथ धोकै, पिण्ड भरावै तेपण रह्या इवाणी। जोगी होय के मूंड मुंडावै, कान चिरावै, गोरख हटड़ी धोकै। तेपण रह्या इवाणी, तुरकी होय हज काबो धोकै, भूला मुसलमानों।

के के पुरुष अवर जागैला, थल जाग्यो निज बाणी। जिहिं के नादे वेदे शीले शब्दे, लक्षणें अन्त न पारूं। अंजन मांही निरंजन आछै, सो गुरु लक्ष्मण कंवारूं।