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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 51 / 120

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जोगी शब्द मांनै नहीं, सतगुरु कही विचार।

देवजी न्हयालै साध न, हुकम कियो तिण बार।

शब्द 51

ओ३म् सप्त पताले भुंय अंतर अंतर राखिलो, म्हे अटला अटलूं। अलाह अलेख अडाल अजूनी शिंभू, पवन अधारी पिंड जलूं।

काया भीतर माया आछै, माया भीतर दया आछै। दया भीतर छाया जिहिं कै, छाया भीतर बिंब फलूं।

पूरक पूर पूर ले पोंण, भूख नहीं अन्न जीमत कोंण।