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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 52 / 120

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जोगी इस विधि समझिया, आया सतगुरु भाय।

देव तुम्हारे रिप कहो, म्हानै द्यो फुरमाय।

शब्द 52

ओ३म् मोह मण्डप थाप थापले, राख राखले, अधरा धरूं। आदेश वेसूं ते नरेसूं, ते नरा अपरंपारूं।

रण मध्ये से नर रहियों, ते नरा अडरा डरूं। ज्ञान खड़गूं जथा हाथे, कौण होयसी हमारा रिपूं।