शब्द 61
ओ३म् कै तै कारण किरिया चुक्यौ, कै तै सूरज सामों थूक्यों। कै तै उभै कांसा मांज्या, कै तै छान तिणूका खैंच्या।
कै तै ब्राह्मण निवत बहोड़या, कै तै आवा कोरंभ चोर्या। कै तै बाड़ी का वन फल तोड़या, कै तै जोगी का खप्पर फोड़या।
कै तै ब्राह्मण का तागा तोड़या, कै तै बैर विरोध धन लोड़या। कै तै सूवा गाय का बच्छ बिछोड़या, कै तैं चरती पिवती गऊ बिडारी।
कै तैं हरी पराई नारी, कै तै सगा सहोदर मार्या। कै तै तिरिया शिर खड़ग उभार्या, कै तै फिरतै दांतण कीयो।
कै तै रण में जाय दों दीयो, कै तै बाट कूट धन लीयो। किसे सरापे लक्ष्मण हुइयूं।