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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 74 / 120

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बालनाथ कंवलनाथ, दोऊ उतरे आय।

एक अतीथ डेरे टिक्यो, दूजो वस्ती में जाय।

शब्द 74

ओ३म् कड़वा मीठा भोजन भख ले, भखकर देखत खीरूं।

धर आखरड़ी साथर सोवण, ओढ़ण ऊंना चीरूं। सहजे सोवण पोह का जागण, जे मन रहिबा थीरूं।

सुरग पहेली सांभल जीवड़ा, पोह उतरिबा तीरूं।