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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 75 / 120

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महलूखान जब यों कही, सुणों बड़े तुम पीर।

सरै तोरै में है लिखी, कीया महमंद सीर।

शब्द 75

ओ३म् जोगी रे तूँ जुगत पिछाणी, काजी रे तूँ कलम कुराणी।

गऊ विणासों काहैं तानी, राम रजा क्यूं दीन्हीं दानी। कान्ह चराई रनवे बानी, निरगुन रूप हमें पतियानी।

थल सिर रह्या अगोचर बानी, ध्याय रे मुडियां पर दानी। फीटा रे अण होता तानी, अलख लेखो लेसी जानी।