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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 76 / 120

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महलूखान तब यों कही, सुणों पीर जी भेद।

क्रिया तुम्हारी मैं चला, मोको उपजा खेद।

शब्द 76

ओ३म् तन मन धोइये संजम होइये, हरख न खोइये।

ज्यूं ज्यूं दुनिया करै खुंवारी, त्यूं त्यूं किरिया पूरी।

मुग्धां सेती यूं टल चालो, ज्यूं खड़के पासि धंनूरी।