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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 77 / 120

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बालनाथ जोगी कहै, सुणों देव मो बात।

भेरूं जोगण जे जपे, तिहिं का फल कहिये तात।

शब्द 77

ओ३म् भूला लो भल भूला लो, भूला भूल न भूलूं। जिहिं ठूंठड़िये पान न होता, ते क्यूं चाहत फूलूं।

को को कपूर घूंटीलो, बिन घूंटी नहीं जाणी।

सतगुरु होयबा सहजै चीन्हबा, जाचंध आल बखाणी।

ओछी किरिया आवै फिरिया, भ्रान्ति सुरग न जाई। अन्त निरंजन लेखो लेसी, पर चीन्हैं नहीं लोकाई।

कण बिन कूकस रस बिन बाकस, बिन किरिया परिवारूं। हरि विन देह रै जांण न पावै, अम्बाराय दवारूं।