शब्द 77
ओ३म् भूला लो भल भूला लो, भूला भूल न भूलूं। जिहिं ठूंठड़िये पान न होता, ते क्यूं चाहत फूलूं।
को को कपूर घूंटीलो, बिन घूंटी नहीं जाणी।
सतगुरु होयबा सहजै चीन्हबा, जाचंध आल बखाणी।
ओछी किरिया आवै फिरिया, भ्रान्ति सुरग न जाई। अन्त निरंजन लेखो लेसी, पर चीन्हैं नहीं लोकाई।
कण बिन कूकस रस बिन बाकस, बिन किरिया परिवारूं। हरि विन देह रै जांण न पावै, अम्बाराय दवारूं।