शब्द 78
ओ३म् नवै पोल नवै दरवाजा, अहूंठ कोड़रू राय जड़ी। कांय रे सींचो वन माली, इहिं बाड़ी तो भेल पड़सी।
सुवचन बोल सदा सुहलाली, नाम विष्णु को हरे सुणों। घण तण गड़ बड़ कायों वायों, निज मारग तो विरला कायों।
निज पोह पाखो पार असी पर, जाण म गाहि म गायो गूणों। श्री राम में मति थोड़ी, जोय जोय कण विण कूकस कांयों लेणों।