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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 78 / 120

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जोगी बोल्या यों कही, जोग तणी कहो बात।

अलख पुरूष पुरा गुरु, मेटो मन की भ्रान्त।

शब्द 78

ओ३म् नवै पोल नवै दरवाजा, अहूंठ कोड़रू राय जड़ी। कांय रे सींचो वन माली, इहिं बाड़ी तो भेल पड़सी।

सुवचन बोल सदा सुहलाली, नाम विष्णु को हरे सुणों। घण तण गड़ बड़ कायों वायों, निज मारग तो विरला कायों।

निज पोह पाखो पार असी पर, जाण म गाहि म गायो गूणों। श्री राम में मति थोड़ी, जोय जोय कण विण कूकस कांयों लेणों।