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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 79 / 120

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जोगी कहै सुण देवजी, करां म्हे जोग विचार।

श्वासां जीता सुर लहै, उमर होय अपार।

शब्द 79

ओ३म् बारा पोल नवै दरसाजी, राय अथरगढ़ थीरूं। इस गढ़ कोई थीर न रहिबा, निश्चै चाल गया गुरु पीरूं।