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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 80 / 120

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विश्नोई कन्नोज का, चलकै आया ठेठ।

बिछोनौ मखमल जड़यौ, धर्या सतगुरु की भेंट।

शब्द 80

ओ३म् जे म्हां सूता रैण विहावै, तो बरतै बिम्बा बारूं।

चन्द भी लाजै सूर भी लाजै, लाजै धर गैणारूं। पवणा पाणी ये पण लाजै, लाजै बणी अठारा भारूं।

सप्त पाताल फूणींन्दा लाजै, लाजै सागर खारूं। जम्बू दीप का लोइयां लाजै, लाजै धवली धारूं। सिध अरू साधक मुनिजन लाजै, लाजै सिरजन हारूं।

सत्तर लाख असी पर जंपा, भले न आवै तारूं।