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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 81 / 120

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इक साध चल्यो परदेश तै, बूझ बिकाणूं देश।

गाँव धूंपालिये में ही, आय कियो प्रवेश।

शब्द 81

ओ३म् भल पाखण्डी पाखण्ड मंडा, पहला पाप पराछत खंडा।

जां पाखण्डी के नादे वेदे, शीले शब्दे बाजत पौण। तां पाखण्डी ने चीन्हत कौण, जाकी सहजै चूकै आवा गौण।