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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 82 / 120

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शब्द सुणायो देव तब, साध की खुली किवाड़ी।

साध कह्यो अप शब्द एह, वरजियो तब ही मुरारी।

शब्द 82

ओ३म् अलख अलख तूँ अलख न लखणा, तेरा अनन्त इलोलूं। कौण सी तेरी करणी पूजै, कौण सै तिहिं रूप स तूलूं।