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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 83 / 120

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देव तणे दरबार, जमाती आय कै।

जाट जोगी संग, ज्ञान पूछ्यो समै पाय कै।

शब्द 83

ओ३म् जो नर घोड़े चढ़े पाघ न बांधै, ताकि करणी कौन विचारूं।

शुचियारा होयसी आय मिलसी, करड़ा दो जग खारूं।

जीव तड़ै को रिजक न मेटूं, मूवा परहथ सारूं।

हाथ न धोवै पग न पखालै, नहीं सुधी बुधि गिंवारूं।

जुग अनन्त अनन्त बरत्या, म्हे सुनि मण्डल का राजूं।