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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 93 / 120

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नृप मालदेव आविया, देखण गुरू प्रताप।

मूलो पुरोहित संग है, कछु हेत कछु दाप।

शब्द 93

ओ३म् आद शब्द अनाहद वाणी, चवदै भवन रह्या छल पाणी। जिहिं पाणी से इण्ड उपना, उपना ब्रह्मा इन्द्र मुरारी।