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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 92 / 120

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जोगी आयो जम्भ पे, देखै विधि विधान।

पढ़या गुण्या कुछ है नहीं, शास्त्र मत नहीं जान।

शब्द 92

ओ३म् काया कोट पवन कुटवाली, कुकर्म कुलफ बणायो। माया जाल भरम का संकल, बहु जुग रहीयो छायो।

पढ़ वेद कुराण कुमाया जालों, दंत कथा जुग छायो।

सिध साधक को एक मतो, जिन जीवत मुक्त दृढ़ायो। जुगां जुगां को जोगी आयो, सतगुरु सिद्ध बतायो।

सहज स्नानी केवल ज्ञानी, ब्रह्मज्ञानी, सुकृत अहल्यो न जाई। क्यूं क्यूं भणता क्यूं क्यूं सुणता, समझ विना कुछ सिद्धि न पाई।