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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 91 / 120

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देवजी हंकारा किया, रणधीर कही किहि भाय।

रजपूत स्त्री सहित, ऊंट चढ़े ही आय।

शब्द 91

ओ३म् छन्दे मन्दे बालक बुद्धे, कूड़े कपटे ऋद्ध न सिद्धे।

मेरे गुरु जो दीन्ही शिक्षा, सर्व अलिंगण फेरी दीक्षा। जाण अजाण बहिया जब जब, सर्व अलिंगण मेटे तब तब।

ममता हस्ती बांध्या काल, काल पर काले पसरत डाल। ध्यान न डोले मन न टले, अहनिश ब्रह्म ज्ञान उचरै।

काया पत नगरी मन पत राजा, पंच आत्मा परिवारूं।

है कोई आछै मही मण्डल शूरा, मनराय सूं झूझ रचायले। अथगा थगाय ले अबसा बसायले, अनवे माघ पाल ले।

सत सत भाषत गुरु रायों, जरा मरण भो भागूं।