शब्द 90
ओ३म् चोइस चेड़ा कालिंग केड़ा, अधिक कलावंत आयसै। वैफेर आसन मुकर होय बैसेला, नुगरा थान रचायसै।
जाणत भूला महा पापी, बहू दुनियां भोलायसै। दिल का कूड़ा कुड़ियारा, उपंग बात चलायसै।
गुरु गहणां जो लेवे नांही, दश बंध घर बोसायसै। आप थापी महा पापी, दग्धी परलै जायसै।
सतगुरु के बेड़े न चढ़ै, गुरु स्वामी नै भायसै। मंत्र बेलूं ऋद्ध सिद्ध करसै, दे दे कार चलायसै।
काठ का घोड़ा निरजीवता, सरजीव करसै, तानै दाल चरायसै। अधर आसन मांड बैसेला, मुवा मड़ा हंसायसै।
जां जां पवन आसण पाणी आसण, चंद आसण सूर आसण। गुरु आसण सम्भराथले, कहै सतगुरु भूल मत जाइयों। पड़ोला अभै दोजखै।