शब्द 89भावार्थ देखेंओ३म् उरधक चन्दा निरधक सूरूं, नवलख तारा नेड़ा न दूरूं। नव लख चंदा नव लख सूरूं, नव लख धंधु कारूं।तांह परेरै तेपण होता, तिंहका करूँ विचारूं।