मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह4 / 16

भजन 4

खम्मा खम्मा ओ धणियां

तर्ज- खम्मा खम्मा ओ धणियां....

चालो एं सहेल्यां आपा जाम्भेजी रे चालां, निव निव धोक लगावां ए चालो जाम्भेजी रे चालां ।

समराथल सोनवी नगरी, अद्भुत महिमा हे ज्यांरी दूर देशां सू आवे जातरी, नवण करे है नर नारी ।

अदक भूमि रा आपां दरसण पावां, चालो जाम्भेजी रे चालां । 1।

बरस इक्यावन तप्या गुरुजी, ज्ञान दिया था वेदों का, सबदवाणी बड़ी मधुर थी,

किया खुलासा भेदों का, वेद ज्ञान री गंगा में न्हावां, चालो जाम्भेजी रे चालां । 2।

इमरत पाहल मिले पीवण ने, जोत रा दरसण मिलसी ।

माटी काडा नाडिये री, मन रो कमल घणो खिलसी ।

भगतां संता सूं ज्ञान सुण आवां, चालो जाम्भेजी रे चालां । 3।

घिरत खोपरा धूप लेजावां, जोत रा दरसण पावां । मोठ बाजारी चूण ले जावां, समराथल धोरे जावां ।

साखी आरती और मुरली गावां, चालो जाम्भेजी रे चालां । 4।

धान धीणो रूप देवे, धन रा भरे भण्डार । बांझिया ने पूत देवे, दीनबंधु सिरजणहार ।

जुगती और मुगती चावां, चालो जाम्भेजी रे चालां । 5।

चरणचिन्ह और खाण्डो मिलसी, रोटू वाले मंदिर में चोलो चिम्पी जांगलू में, खड़ाऊ पींपासर में ।

दरसण कर मन हरसावां, चालो जाम्भेजी रे चाला । 6।

फोगड़ा कंकेड़ी केर, धोरे पर है कुमटिया । चूण चुगे, मोर गेरी परेवा और सुवटिया ।

रामरतन हरजस गावा, चालो जाम्भेजी रे चाला । 7।