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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह6 / 16

भजन 6

जम्भेश्वर भगवान दयालु सबकी लाज बचावे

(जम्भेश्वर भगवान का अवतार हुआ उस समय जन्मघूंटी देने वाली बुढिय़ा को चमत्कार)

जम्भेश्वर भगवान दयालु सबकी लाज बचावे । बुढिय़ा रो मन देख उदास, गुरुजी ज्ञान बतावे।

जब हिरदे में भयो चानणो, बुढिय़ा मंगल गावे। घूमर घात नाचण लागी, हाथां-ताल बजावे ।

सुणो सहेल्यां नार भोलक्यां, सबने ही समझावे। ओ बालक है जगत पिता श्री विष्णु देव कहावै।

तीन लोक ने पोखण वालो, इणने कौन जिमावे । मच्छ कच्छ रूप धरयो बाराह को, असुर संहारण आवे।

ऋषि मुनि क्या ब्रह्मा सरस्वती, शेष भेद नहीं पावे । जनम मरण सूं न्यारो रैवे, अजर अमर कहलावै।

कांई कांई कहूं ओपमा, इणरी महिमा वरणी ना जावे । बार बार प्रणाम कहे, चरणां में शीष निवावे।

जो नर भगती करे प्रेम सूं, आवागवण मिट जावे। रामकरण कहे धिन धन प्रभु थारी माया लखी न जावे ।

आओनी म्हारी जागण में समराथल रा जाम्भाजी समराथल रा भगत आपरा, संग में लाज्यो जाम्भाजी ।