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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह12 / 16

भजन 12

तर्ज - ब्याव बीनणी बिलखूं

तर्ज- ब्याव बीनणी बिलखूं...

माता हंसा पिता लोहट रो जम्भदेव है टाबरियो । पीपासर अवतार लियो समराथल बैठो सांवरियो । टेर।

मात पिता ने करी तैयारी, ब्याव सगाई म्हें करस्यां माने बहु हुक्म हमारो म्हे तो बैठा भजन करस्यां ।

तूं जम्भेश्वर सींचे कोहर, हल पे हाथ तुम जा धरियो । 1।

मात पिता ने यूं समझावे, बात मानलो थे म्हारी । बाल जती बण रहूं जगत में, सेवा करस्यूं मैं थारी ।

जोगी बणूलां, गुरु करूंला, ब्याव भूल में ना करियो । 2।

मात पिता जब स्वर्ग सिधाए, जोग पणो धारण कीन्हो। मन में समझ गुरु गोरख ने भगवो भेष धार लीन्हो।

शब्द सुणाया, ज्ञान बतायो, छोड़ दियो अपनो घरियो । 3।

नव और बीस नियम बताय बिश्रोई पंथ चलाय दियो। हिन्दू मुस्लिम करी एकता, मन को भरम मिटाय दियो।

शब्द सुणाया, पाहल पिलायो, प्यालो अमृत को भरियो । 4।

परच्यो बादशाह, लोदी सिंकदर, महम्मदखां नागौरी नै। दूदो, सातल सांगा जेतसिंह, मान गया तपधारी नै ।

अनवी निवग्या, पांये पड़ग्या, गुरु फरमाई सो करियो। 5।

ऐसे दीनदयाल प्रभु को, विष्णु रूप समझो भाई । रामकरण कहे फिर जीवन में कमी रहेला ना काई।

विष्णु जपना भव से टपना, जन्म जन्म फिर ना मरियो । 6।