भजन 12
तर्ज - ब्याव बीनणी बिलखूं
तर्ज- ब्याव बीनणी बिलखूं...
माता हंसा पिता लोहट रो जम्भदेव है टाबरियो । पीपासर अवतार लियो समराथल बैठो सांवरियो । टेर।
मात पिता ने करी तैयारी, ब्याव सगाई म्हें करस्यां माने बहु हुक्म हमारो म्हे तो बैठा भजन करस्यां ।
तूं जम्भेश्वर सींचे कोहर, हल पे हाथ तुम जा धरियो । 1।
मात पिता ने यूं समझावे, बात मानलो थे म्हारी । बाल जती बण रहूं जगत में, सेवा करस्यूं मैं थारी ।
जोगी बणूलां, गुरु करूंला, ब्याव भूल में ना करियो । 2।
मात पिता जब स्वर्ग सिधाए, जोग पणो धारण कीन्हो। मन में समझ गुरु गोरख ने भगवो भेष धार लीन्हो।
शब्द सुणाया, ज्ञान बतायो, छोड़ दियो अपनो घरियो । 3।
नव और बीस नियम बताय बिश्रोई पंथ चलाय दियो। हिन्दू मुस्लिम करी एकता, मन को भरम मिटाय दियो।
शब्द सुणाया, पाहल पिलायो, प्यालो अमृत को भरियो । 4।
परच्यो बादशाह, लोदी सिंकदर, महम्मदखां नागौरी नै। दूदो, सातल सांगा जेतसिंह, मान गया तपधारी नै ।
अनवी निवग्या, पांये पड़ग्या, गुरु फरमाई सो करियो। 5।
ऐसे दीनदयाल प्रभु को, विष्णु रूप समझो भाई । रामकरण कहे फिर जीवन में कमी रहेला ना काई।
विष्णु जपना भव से टपना, जन्म जन्म फिर ना मरियो । 6।