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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह14 / 16

भजन 14

संग री सहेल्या रलमिल चाली, आपा मेले जायसा

संग री सहेल्या रलमिल चाली, आपा मेले जायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । टेर ।

धोरे ऊपर हरी कंकेड़ी, झिगमिग जोत जगायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 1।

अगुणी पेड़ी चढ़ धोक लगायसां, हुय उतराधी आयसां ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 2।

गोरी गायां रो घिरत ले जायसां, गुरूजी री जोत जगायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 3।

फागण बदी तेरस और चवद्स, शिवरात्रि रो जागण लगायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 4।

दिन ऊगेरी भावज आपां, गूगल घिरत चढ़ायसा ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 5।

भगवी टोपी काली माला, नित उठ दरसण करस्या एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 6।

चिडिय़ा गेरी मोर सुवटिया, बाने चूण चुगायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 7।

हरि चरणां में कालूराम बोले, आपा रलमिल जायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 8।