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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह15 / 16

भजन 15

मैं जिसको प्रणाम करूं

मैं जिसको प्रणाम करूं, वो सतगुरु देव जम्भेश्वर है।

ध्यान लगाऊ, शीश निवाऊ, एक भरोसा उन पर है।। टेर।।

उनकी रचना नृसिंह ने प्रहलाद को दरस दिखाया था

युग युग में प्रभु जीव तारने दिया वचन निभाया था

कलयुग में जाम्भोजी आये, उनका ही फरमाया था।। 1।।

बागड़ देश गांव पीपासर जाम्भोजी का जनम हुआ

माता हंसा पिता लोहट के आंगन में शुभकर्म हुआ

ओम विष्णु पूजा ओम विष्णु सुमिरण जाम्भोजी का जनम हुआ। 2।

पन्दरासो के साल बयाले जाम्भोजी पंथ प्रगट किया

सबसे पहले जाम्भोजी ने पूलहोजी को पाहल दिया

भव से पार तारने वाला ओम विष्णु का मंत्र दिया। 3।

उनसे तो अरदास करेंगे वो ही सुनने वाले हैं

सब जग के प्रभु कर्ता धर्ता वो ही रखने वाले हैं

सेवक रामकरण कहे गुरुजी रक्षा करने वाले हैं। 4।