भजन 14
संग री सहेल्या रलमिल चाली, आपा मेले जायसा
संग री सहेल्या रलमिल चाली, आपा मेले जायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । टेर ।
धोरे ऊपर हरी कंकेड़ी, झिगमिग जोत जगायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 1।
अगुणी पेड़ी चढ़ धोक लगायसां, हुय उतराधी आयसां ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 2।
गोरी गायां रो घिरत ले जायसां, गुरूजी री जोत जगायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 3।
फागण बदी तेरस और चवद्स, शिवरात्रि रो जागण लगायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 4।
दिन ऊगेरी भावज आपां, गूगल घिरत चढ़ायसा ए जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 5।
भगवी टोपी काली माला, नित उठ दरसण करस्या एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 6।
चिडिय़ा गेरी मोर सुवटिया, बाने चूण चुगायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 7।
हरि चरणां में कालूराम बोले, आपा रलमिल जायसा एं जाम्भेजी रा दरसण पायसां । 8।