साखी-76
आखर आखर लेखो मोमिणो मांगिये, घर घर फिरे नकीबा
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आखर आखर लेखो मोमिणो मांगिये, घर घर फिरे नकीबा
खेवट आयो जंभराज नाव ले, चड़सी जासे नसीबा
चड़े जासे नसीब रे जीव, महल दुतर तारिया
कवल महमद आय पुगा, उस तजो वग्य हकारिया
पांच वखत निवाज रोजा, कवल काजी रंजिया
इमान राखो सिदक चालो, आखिर लेखो मांगिया ( १ )
दुलम देश पिराणियां, अंबाराय सहेटा
विसन सवारी लाडली, वाह घड़ी मुख मेलो जीव सहेटा
मुख मेलो जीव सहेट, लाडी अष्ट धात सहरिये
लेखो लेखै दो प्रेसता, खत देख दुतर तारिये
अमि अमृत भोग मनसा, जे हक साच पिछाणियां
कबज कर ले चलो जीव कुं, दुलम देस पेराणियां ( २ )
चडि नै चौबार लाडली गोखड़ी, पहर पटंबर झुनां
साथि म्हारा आवण कहि गया, कदि मिलसी बाग विछुनां
बाग विछुनां मिलै क्योंकरि, क्रोड़ बारां जोड़णी
कलि काले करण क्रिया, मोह माया तोड़णी
जम्भदेवा करूं सेवा, अति पात सहारिये
वैकुण्ठ साहा मन उमाहा,लाड़ी चड़ी खड़ी चौबारिय ( ३ )
खेत मुक्त घर जाइये, आवागमण न होई
रतन काया सुरगे उजली, मनसा कर रस होई
कर मनसा होय सब कुछ, हिरदे सागुण पेखिये
तेतीस क्रोड़ देवता, तां मांही सतगुरु देखिये
कजौ सबळ चढो बेड़े, हेत करके धियाइये
आवागमण न होय रे जीव, खेत मुकति घर जाइये ( ४ )