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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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साखी-75

बाजे रे मादलिया सरलै सादनै, स्वामीजी रा शब्द सुहावणा

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बाजे रे मादलिया सरलै सादनै, स्वामीजी रा शब्द सुहावणा

आज म्हारे मन की पुगी छै आस, दिन रल आवणा

दिल भीतर मोमणो पुरेली चौकनै,

हिरदे साल्हिया बुलाउंली मोमणा बीर नै

थूल प्रचंड परहरो बुलाय मोमण दिलो चोखा,जास हदी हरि हम रल्या

क्रितजुग पहलाद सीधो, पांच कोड़ी ले तिरयो

पाणी मांहि राख लियो, नांहि होहु परजल्यो

तोय विष्णु को नाम न छाडयो, दैत दाणव झूरियो

भेर भोगल शंख बाजै, चौक चंदन पूरियो (१)

जुग तेता रे मोमण, हरिचंदनै यज्ञ रचावियो

सत संजम रे मोमणो, धर्म आचार नै निज फल पावियो

निज फल स्वामीजी को जिन्हां पायो, जिण एकायंत मन कियो

जीव काजे नारी खरची, शाह घर पाणी छल्यो

सत न छाडयो धर्म न हारयो, हुवो दणियर साखियो

सातां कोड़ां को मुखी हुवो, जुग त्रेता हरिचंद तारियो (२)

जुग द्वापर रे मोमणो, पांचो वीर नै संग राणी द्रोपदी

सतवादण रे मोमणो कुंतादे, मायनै गति ले तरी

सतवादण रे माय कुंता तरी, सत द्रोवा नारनै

सत होता चढ बेड़े, लंघ्या भवजल पारनै

सतवादी धर्म धीरा, करणी साह सधीरणा

नवां कोड़या का मुखी हुवा, जुग द्वापर पांचो वीरणा ( ३ )

कलिजुग रे मोमणा करणी कमावो, उदोजी यूं भणे

जुल चालो रे साचे साहिब के पंथनै, जीव काजे आपणे

जीव काजे भलो कीजे, हे हे बुरो न कीजिये

आये सुभ्यागत सेवा कीजे,पगे निवण कीजिये

आयो सुभ्यागत गुरु कर मानो, करियो उनकी सेवजी

अनंत कोड़ा को मुखी आयो, जुग जुग जंभराज देवजी ( ४ )