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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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साखी-77 राग गौड़ी

सो दिन लिखदे जोयसी, हंसराय करै पयाणो

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सो दिन लिखदे जोयसी, हंसराय करै पयाणो

धंधो अधिक निवारिये, सब जुग होय विड़ाणो

जुग विड़ाणो मन पछिताणो, विष्णु विष्णु धियाइये

पुण्य मार्ग धर्म क्रिया, दियो सोई पाइये

सुक्रत पाखो लाछ लिछमी, संग कछू न होयसी

जा दिन हंस करे पयाणो, सो दिन लिखदे जोयसी ( १ )

तिल तिल घड़ी महूरतां, सो दिन नेड़ो आवै

इण कलि बहुलां पंडिता, सो दिन कोई न बतावै

दिन न बतावै जद लेण आवै, जब जीव संकट पड़ै

राव राणा खान खोजां, तास सूं कोई न अड़ै

पकड़ गुन्हीं ज्यूं चलावै, तां दिन कुण छुड़ावसी

तिल तिल घड़ी महूरतां, सो दिन नेड़ो आवसी ( २ )

नख चख सूं जीव नीसरे, ता दिन को डर भारी

नांणो किण रो सैंणो छोड, चाल्या कुड़ी प्यारी

कुड़ी प्यारी हंस छोड चाल्यो, हेत हुरमत सब गई

नितवार चंदन खोल करती, छिन एक में गंदी भई

परहरो माया लाछ लछमी, पूत प्रीतम नारियां

नख चख सूं जीव नीसरे ता दिन को डर भारियां ( ३ )

फंद पडयो जमदूत को, तब मूर्खो पछिताणों

सांईजी रो स्मरण ना कियो, बूझत ही सकुचाणो

सकुचाय जीव नैं जबाब ना आवै, कहो किस विध छूटिये

तेरा संग साथी नही कोई, गयो जमपुर कूटिये

देख माया गरब करतो, सीस मुकुट मोती जड़े

कह 'लालचंद' पछिताण लागो जमदूत के पानै पड़े ( ४ )