साखी-136
आगम जी आगम कृतजुग रोप करे,
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आगम जी आगम कृतजुग रोप करे,
सैंस कला सरबंगी हरखो मुनियरौ
रतन वीराणे लेर छिपे, मच्छ फिरत न संगी हरखे मुनियरौ
मच्छ रूप संखासुर मारयो, कीया उजल वीरांणो
कोर्भ रूप मधु कीचक मारयो, वराह रूप मुर दाणो
नृसिंह रूप हिरणाकुश मारयो, क्रोड़ पांच पहुंता सुपात करे
चरण चतुर्भुज मनसा रूपी, आगम कृतजुग रोप करे (१)
मणियारो मणिहार वनारस खेत जुड़े,
सुरता सहज करेहरखो मुनियरौ
जीव देखो हरिचंद बाट सही,
कब घुल घुल मिलै पियारे हरखे मुनियारौ
मिल पियारे प्रीतम म्हारै, परवस बंधया सेवा करे
जीवड़ा काजै करणी जागी, गुरूमुख ठाडे पंथ सिरे
बावन परसराम हेल महरांव, राम लिछमण लंक जुड़े
सात क्रोड़ी जुग त्रेता पहुंति, ओर वनारस खेत जुड़े (२)
जीव करे अति पति मन रलि,
जीव न सहे दुख भारी हरखे मुनियरौ
केइ केइ सी'क चहोड़ करे,
केइ केइ पिनरे जुहारी हरखे मुनियरौ
फिरे जुहारी बड़ व्योपारी, आपस जीव ले अतर तरे
कन्हड़ होय कर गऊ चराई, पहलां गोकल खेल खिले
बुध रूप खापर मारयो, कंस के संग संग्राम किये
नव क्रोड़ जुग द्वापर पहुंता, करे अति पानो रलिये (३)
भण्य त्रिभुवण राव सही,
कल्प दसवें अवतारो हरखे मुनियरौ
छोड़ो माया जाळ सही,
न राचो संसारो हरखे मुनियरौ
छोड़ो माया जाळ दूनी का, मन हियड़े सोच विचार करे
कल्प मां सुर नर आय प्रगास्यो, मोख मुगति समझाय करे
हरजी हरि परि लीव लेखो, बारां कोड़ि कंमाह्य दई
कल्प मां काल्यंग कुं हरि विसमल करिसी,
कल्प दसवें अवतार सही (४)