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साखी-104
आ तो पोह फाटी पगड़ो हुवो, कुकड़ले दीनी बांग
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आ तो पोह फाटी पगड़ो हुवो, कुकड़ले दीनी बांग
उठ बंदा कर बंदगी, (क्यों) साहब पासो मांग
बोल्या विष्णुजी रा जीतवा, बोलियो भली सुरवाणी
थारो बोलतड़े रो शब्द सुहावणो,थारी चांचड़ली केसरि रो रंग
चंदण थारी गात पखालियो । टेर ।
कांय जागै धनियो धन आगलो, कै साहेब को सुचियार
सतजुगे पहलादो जागियो, क्रोड़यां सातां रो आगीवांण ।
दवापुर दहुठल राजा जागियो, क्रोड़यां नवां रो आगीवांण ।
तो ने सोहेदल वरजे रे कूकड़ा, आधी रात न बोल
सूतो अहमनजी ओदके, अर्जुन केरो रे पूत ।
हूं तो थारो वरज्यो सोहेदल ना रहूँ, म्हाने हुकम दियो करतार
कलजुग कायम राजा अवियो, क्रोड़या अनन्तां रो तारणहार ।
'उदो' बोलै कूकड़ो, म्हारी आवागवण निवार ।