साखी-96
उतर दिसा दोय मोमण आया,
इस रचना का भावार्थ उपलब्ध नहीं है।
सवैया
जे पाहण छै देव, शैल बड़े जाय धोको
कूड़ो माया जाल भ्रम कांम भूलो लोको
धौकौ कांठ पखाण, हरख घंटि कांय बजाओ
सूकै उपरि पाती धरो, हरयो कांय तोड़ि सुकावै।।
केसरी चन्दन पूजता लिए वहंता साथ (में)
पाहण-पाहण मिल गया ऊदा आया जम के हाथ (में)
उतर दिसा दोय मोमण आया,
घर पुछा वै रूड़े साधा को
ऊंचो मरवौ बारी विजौरो जी,
ओ घर रूड़ै साध को ।
पुछत पुछत साधु जण आया
हेत कर मिलो सती आमैणी
मनसा भोजन इमरत मेवा,
प्रीति पलंग बिछाणी ।
पाड़ोसण पूछै कूंण ज आया जी,
किंण नाते कुंण पाहुणां
आमैणी कहे म्हारे गुरु को नातो जी,
साधु ये आया म्हारे पाहुणां ।
लेहनी पाड़ोसण पांव री हे पायल,
म्हारी तो सासू आगल मत कहै
थांरी तो पायल थेई ज पहरोजी,
म्हारी तो अलवी बहनड़ ना रहै
लेवैनी पड़ोसण हाथ रो हे मूंदड़ो,
म्हारा तो छंदा बहनड़ ना रहै
थारो मूंदड़ो साथे ईज पहरोजी,
म्हारी नीमांड़ी बैहनड़ ना रहै ।
लेवेनी पाड़ोसण सीस री हे चूंदड़ी,
म्हारा तो छंदा बैहनड़ छायले
थांरी तो चूंदड़ी थे इज ओढ़ोजी,
म्हारी निसरमी बैहनड़ ना रहै ।
लेवेनी पाड़ोसण गलै रो हे वाल,
म्हारी बडेरी आगल मत कहै
थांरो हे वाल थे इज राखो जी,
म्हारी अलवी बैहनड़ ना रहै ।
न जाणौं चोर थांनै जाणूं साध थांनै,
तारा उगौणां दोय जणा मोकला
काला बलदां पुता बहल जुपाड़ोजी,
घरां निकालो बहु आमैंणी ।
आवैलो बेटो कड़िया लीयोजी,
नींबोल गायो सती आगली
निबलो बेटो भूखो हुवो जी,
खोखा खिर धरती पड़या ।
आवैलो बेटो तिसायो हुवोजी,
सूका सर पाणी छल्या
माया हुती सा तो कोयला हुई जी,
रिध सिध लेगी बहु आमैणी ।
धोलां बलदां पुतां वाहल जुपाड़ोजी,
पाछी लियाओ बहू आमैणी
धरती माता तो हार जे दीन्होजी,
धरां समांणी सती आमैणी ।
स्वर्गापुर मां हुई बधाई,
स्वर्गा पहुंची सती आमैणी
जैसो कमावो तैसो फल पावे,
कुमाई लहै छै आपो आपणी ।