प्रचलित अप्रचलित अन्य साखी
साखी-95
गुरु भाइयो । टेर ।
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गुरु भाइयो । टेर ।
दिवलो दीन दिल मां धियाइयो, हुइयो सुरां सरीखा
राजाये राज तज्यो जीव काजा, गुरु शिष्य मांगी भीखा ।
चांद छिप्यां निश होय अंधियारी, गुरु बिन एह परीखा
कांहीअनैसो कांही मनैसो,सब सुणियो इंहिगुरु की सीखा ।
साथ चले हम सीर जे भाइयो, करतब झुरी भीखा
हासल जमां मूवां जीव जाणै, जदि गुरु मांगे जीका ।
जुमलै गोठि मिलो संग साधो, अबधु में कांय देखो देखा
सतगुरु सांई सब तुझ तांई, पाप धर्म का लेसी लेखा।
गुरु फरमाई टलै न भाई, गुरु सदां की मेखा
गुरु वटि छुटी करंण पहेल रहे ना एका रेखा ।