मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह308 / 157
प्रचलित अप्रचलित अन्य साखी

साखी-133

ओ जापियो रे जी भाई मोमणो, हम घड़ी वेलां आए

इस रचना का भावार्थ उपलब्ध नहीं है।

ओ जापियो रे जी भाई मोमणो, हम घड़ी वेलां आए

हम उन मेलो करि गुरु कायमा,जाणो अटसठ तीर्थ न्हाए ।

जो पुन अटसठ जी भाई तीर्थों, गुरु सुभ्यागत म्हारौ

देवदयालजी भाई मोमणो, देतन करौ उधारो ।

जैसा सुपना जी भाई रैणका, ऐसा यो संसारो

कांई भाई मोमीणो ओ धन संचो, संच संच छलौ बुखारो ।

ओ धन खीक जी भाई होयसी, खाली रह्या बुखारो

दुल दुल घोड़ो जी भाई साखती, हीय कायम असवारो ।

वसुधा कँवारी जी भाई परणसी, आप कृष्ण मुरारो