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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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देश पिछम कै गरज करै, घण ओल्हर आयो

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देश पिछम कै गरज करै, घण ओल्हर आयो

मन मोमणां कै आनंद भयो, कथि ज्ञान सुणायो

कथ्यो ज्ञान सुहावै सतगुरु, सुगण सोबति बूठियो

चेत दिल मां भयो भगतां, गुरू गावां तूठियो

अवगत अमृत ज्ञान वूठो, लिख्यो साधां पाइयो

सब मोमण देश पिछम, घण गरज ओल्हर आइयो (१)

अमीयन के बूंद झरै, दिल भीनां तेरा सांधां

हिरदे जांके ज्ञान बस्यो, जांका कवल था सीधा

कवल घट जां हुवा सीधा, हक साच पिछाणियो

नांव हरि को भयो ऐसो, नांव केशो जाणियो

हरि हरि साधो, अवसर न दूजो केहनां

चेत दिल मां भयो भगतां, साध भीना तेहनां (२)

बहरां आगै ज्ञान कथो, गुरु अबूझ बुझाया

अमलां को गुरु माण मल्या, गुरु अनु नवाया

अनु नवाया गुरु दाता, धरणीधर धीयाइयो

दीन कायम रहै वसेती, रतन भवन बताइयो

जासै करता भयो शंभू, वाचा पालण आइयो

वाचा पाल यतिवर्ता, अजाण अबूझ बुझाइयो (३)

जंभराज तूठो भाव करै, क्रोड़ि बारां के तांई

जुग चौथे फेर करै, पारघर पहुंचाई

पहुंचाय घर हरि होय बेली, सुचियारा तो लह्यो

नरसिंह रूप बण भाख्यो, प्रहलाद सेती ते कह्यो

कांही कृतजुग कांही त्रेता, कांहि द्वापर तूठियो

जुग चौथे क्रोड़ बारां, जंभ जुग जुग बूठियो (४)