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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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प्रचलित छन्दा की साखी

साखी-29

कपिल सरोवर नाम, कलयुग तीर्थ थापियो

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अवगत अलख अपार, पार पावै नहीं कोई

आद अन्त अरु मध, वेद कथ हारे सोई

सचिदानन्द स्वरूप, धियान जोगेश्वर धियावे

रात दिवस लवलीन, अंतर का मैल गमावे

दासपण सूं हरि भजे, भकित भावना मन धरे

भवसागर दु:ख मेट कै, अमर पद वासो करे

कपिल सरोवर नाम, कलयुग तीर्थ थापियो

देश फलोदी मांय भाग परापत पावियो

भाग परापत पावियो नैं, कृपा करी जगदीश

आदू तीर्थ प्रगट किया, सही बिस्वा बीस

कपिल मुनि तापे इहां नैं, तपे ऋषेश्वर जोग

जंभ सरोवर नाम अब, प्रगट कहे सब लोग

कलजुग तीर्थ थापियो (१)

द्वापर जुग के मांय, बहु यज्ञ कर हरि पूजियो

पांड परमार्थ रूप, वेदव्यासजीनै पूछियो

वेदव्यासजीनै पूछियो नैं, थे कृपा करो भगवान

दिव्य दृष्टि है आपकी, म्हां सूं कहो बखाण

ऐसो तीर्थ जगत में, जहां अनन्त गुणों फल होय

जिहिं तीर्थ म्हे यज्ञ करां, म्हारी मनसा पूर्ण होय

वेदव्यासजी नै पूछियो (२)

कलजुग मंझ के मांहिं, पाप पूरै जग छावसी

तीर्थां रो घटै प्रभाव, दशों दिश दोष दरसावसी

दशों दिश दोष दरसावसी नैं, धर्म हीण संसार

श्रुति पुराण भागवान को, मानै नहीं लिगार

धर्म अंग राजा हुवै, पूछै श्रुति विचार

गोप तीर्थ प्रगट करै, महिया बधो अपार

घर घर मंगल छावसी (३)

कपिल सरोवर नाम, कृतजुग में कह भखियो

तीर्थ अधिक अनूप, वेदव्यास यूं अखियो

वेदव्यास यूं आखियों नैं, पांडू चल्या परदेश

यज्ञ करणे रै कारणे, आया बागड़ देश

विविध भांति से यज्ञ किया, उत्तम तीर्थ जाण

हेत कर हरि पूजियो, पांडू परम सुजाण

जम्भेश्वर यूं आखियो (४)

तीरथ जांभोलाव, हेत कर जहां जाविये

हर्ष करेकर कोड, जाण अर गंगा न्याविये

जाण गंगा न्हाण कीजे, माटी सूं चित लाय

निसार माटी करो पूजा, निवंत साधा जिमाय

विष्णु मंदिर होम कीजे, प्रकमा कर प्रीत

साखी हरिजस शब्द गावै, कर कर उछब रीत

श्री जम्भेश्वर गुण गाइये (५)

तीर्थ बड़ो तलाव, जहां जाय सूत फिराइये

भाव भक्ति मन सार, सहंस गुणों फल पाइये

सहंस गुणों फल पाइये नैं, जो सेवै मन काम

सायुज्य मुक्ति मिले, पावै मन विश्राम

अड़सठ तीर्थ ऊंपरा, श्री जंभ सरोवर धाम

श्री जम्भेश्वर की कृपा से , वर्णित ‘गोविंदराम’

श्री जम्भेश्वर गुण गाइये (६)