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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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साखी-120

कलियुग कृष्ण पधारे, संतां कर्म संभालो

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कलियुग कृष्ण पधारे, संतां कर्म संभालो

जन बाड़े सों बीछडया, तहां करण प्रतिपालो

प्रतिपाल करण गुवाल आयो, प्रीत भद्रां पालही

कवल कारण धरी देही, धर्म चाल्यो चालही

साच शील संतोष संग्रह, प्रीत कर लागो पगे

प्रहलादजी के कवल कारण, कृष्ण आयो कलियुगे (१)

कूड़ा कूड़ा कुगुरानै छाड, सुगुर बिलम्या सेवजी

क्रोड़ि द्वादश कारणै, दुनियां प्रगटयो देवजी

देव दुनियां हुवो प्रगट, देह धर आया दई

आन को आराध छूटो, श्यामजी मिलिया सही

आपणा अपणाय लेसी, स्वर्ग दे साचा सुगुरां

खरां खोटां कर परेखा, छाड़िया कूड़ा कुगुरां(२)

जब लग पिंजर प्राणियों, जिभिया जप जगदीश

जीवड़ानै जम छोड़े नाहीं, सही बिसवो बीस

बीस बिस्वा साझी सुक्रत, हेत हरिजी सूं करे

अंजली जल जाण रे जीव, आव तूटै इण परे

जबर जालम जगत डांडै, डहकि जीवड़ानै डसे

स्वांस स्वांस अरदास कीजे, प्राणियों पिंजर बसे (३)

दरस दीजे देवजी, आवागवण न आण

सांसो मेटो श्यामजी, प्रीतम लियो पिछाण

पिछाण के प्रतिपाल कीजे, मेटिये सांसो सही

हरि हिसाबनै बूझही, वरग बानें की बही

पांच सात नव क्रोड़ि बारां, श्याम सबही लीजिये

दास ‘केशो’ आस थांरी देव दर्शन दीजिये (४)