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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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साखी-121

सतजुग वाचा क्यों सरे, क्य धर हुई उमेद

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सतजुग वाचा क्यों सरे, क्य धर हुई उमेद

सुकरत की पत कारणे, पाठ चल्यो रुघवेद

एक पाठ चल रुघवेद आंणौ, उतर पूजा परहरी

तिंहु लोक मां अलोप मुरति, अलख न लखियो जग हरी

सीव वाच साची राखे, सतगुरु नारस्यंघ दांणौं हरे

क्रोड़ि पांच सूं प्रहलाद सीधाो, सतजुग वाचा यौं सरे(१)

जुग तेत्ता मोमणो क्रोड़ी क्यौं तरे, वेद सकल झिणकार

साधा सेवग के कारणे, आप लियो अवतार

आप हरी अवतार लीयो, सार कारण मोमणां

परमोधा उत्तरखंड ल्यायो, दैत संगह्य अति घणां

परसरा सैंसरबाहु माख्यो, टेक राखी सत पगे

रोतास हरिचन्द धान्य तारा, क्रोड़ि सात तरी त्रेता जुगे(२)

जुग द्वापरे क्रोड़ी क्यौं तिरे, सुलै सीकै सरीर

साधा सेवग के कारणे, कसणी सह सरीर

होर हरि जेण सहै कसणी, धरम जुग जुग सारखौ

तिण वार सतगुरु आप पहुंतो, खरां खोटां पारखौ

वुधा खाखर खान मारियो, धरम जुग जुग संचरे

पांच पांडव धन्य कुंतां, नव क्रोड़ि द्वापर निसतरे (३)

कलजुग बारां कारणे, आयो आप अलेख

सुरजन सोई गुरु सेविये, जिण धारियो भगवों भेख

धार भगवों भेख आयो, सुगुरु वाणी संभले

सबद सूं परतीत साची, जोत परगट निज थले

ओ३म् आदि अकल अलेख, सुमुरत वाच जुग जुग सारणा

अनंत क्रोड़ि अलेख, कलजुग बारां कारणां (४)