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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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साखी-71 तालाब की

कलियुग तीर्थ थापियो, भाग परापति पाविया

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कलियुग तीर्थ थापियो, भाग परापति पाविया

देश फलोदी मंझ थप्यो, पाप न रहसी परसियां

जाय परसो विष्णु तीर्थ, सिर सूं माटी काढियो

तेरा हुवै पिछला पाप खंडत, स्वर्ग में सुख लाटियो

कह 'रायचंद' सत्य जाणो, पाप न रहसी पापियां

अवतार जंभ नरेश को कलि, मंझ तीर्थ थापियां (१)

जिस भूमि पंडवा यज्ञ रच्यो, तहां सूत फिराइये

जहां सहदेवजी तीर्थ थाप्यो, जीवड़ा काजे न्हाइये

जीव काजे काढि माटी, पाल पर परवाहिये

तेरी हुवै आवागवण खंडत, मुक्ति निश्चय पाविये

कह 'रायचंद' सत्य जाणो, उस तीर्थ तो जाइये

जिस भूमि पंडवां यज्ञ रच्यो, जहां सूत फिराइये (२)

सो पुनि अड़सठ तीर्थ थप्यो, विष्णु तालाब सत जाणियों

जैसे द्वारिका कृष्ण रहे, मुक्ति हुवै गुरु वाणियो

गुरु वचने मुक्ति लाभे, उस तीर्थ में जाइये

काशी बदरी अरु हर की पैड़ी, जाणि गंगा न्हाइये

कह 'रायचंद' सत्य जाणो, कांय भूला मन हठे

विष्णु तालाब तुम सत्य जाणो, और तीर्थ अड़सठे (३)

कलियुग परच्यो हाल लहो, कबूलो माटी निसारणी

अंधा लोयण मिले सही, इच्छा करै मन बांझड़ी

बांझ इच्छा विष्णु पूरे, उस तीर्थ निश्चय जाइये

निसार माटी करो पूजा, निवत साध जिमाइये

साथरी गुरु को इसो तीर्थ, जाय कंधा निवाइये

कर जोड़ि 'रायचंद' करै विणती, हाल परचो पाइये (४)