साखी-72
मै तुम्हारा श्याम सपीहर सिंवरियो
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मै तुम्हारा श्याम सपीहर सिंवरियो
जुगति सह जाणण जोग, नाम तेरा भावणां टेर।
सुर तेतीसां सूं मेलो, जां मिलिये अनंत बधावणां
बधावणां स्वामी नाम तेरे, सदा जीवड़ो रैसिये
दुःख दालद दुरत नासै, कंवल ज्यों मन विगसिये
सदावरती श्याम सिंवरौ, मोमणा रो धान्य जीयो
सुरां सेती मेल सतगुरु, जीवां काजे जपीयो (१)
सतगुरु बिन मुकति न हुवै, गुरु बिन पंथ न पाइये
सुगुरु मोमण बिन गोष्ठि न होय, मिलिया एकायंतिये
मिलिया एकायंत दिलो चोखे, ज्ञान गुरु को बोलिये
झूठ परहर जीव मेरा, सांच रतियां तोलिये
आप शंभू सीख देवे, सहल उमंत जोविये
साच स्वामी बिन को पार लाभै,गुरु बिन मुक्ति न होविये(२)
जिंह गुरू के पर सादे पहुंचा पारि, सो गुरु एक मन जाणियो
जुगां-जुगां को तारण जंभराज आवियो, जे हक साच पिछाणियो
हक साच स्वामी को जेह पिछाण्यो, जुगे जुग जरणा जरी
पांच सात नव कोड़ि बारां, वास दो अमरापुरी
तेरे नाम लिये दुख दुरति नासै, सिंवरो साहब आपणां (३)
तुम्ह बिन अवर न कोय, तुम्ह दरयाव तुम्ह दिवै
पिता कुटुम्ब परिवार, हलते पलति स्वामी तुम्ह शरणै
शरण शम्भू सृष्टि करता, सहल उमंति जोवियो
विखम भवजल भवन चवदह, मुक्ति खेत उतारियो
आश म्हारी करो पूरी, मांग मत घातो खता
भणै 'ऊदो' शरण थांरी, तुंहि दाता तुंहि पिता (४)