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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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साखी-130

कलि मां कलम फिरी, अब छोडो मेरा

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कलि मां कलम फिरी, अब छोडो मेरा

आलमैं सिंवरियो, जुग चौथे फेरा

जुग चौथे विष्णु मिलियो, हाथ जप माला जपै

खाध पूगी लेवे लेखो, हुकम हासल रवि तपै

छेद कालंग चढै दुल दुल, गिणै मेर न तेरियां

अलख लखो गुरुजंभ पिछाणो,कलिमां कलम फेरियां(१)

गाफल भूखा रह्या, गुरु म्हारे साध चिताया

सुर तेतीसां मिलिया, शुभ सहज समाया

सहज सुर तेतीसां मिलिया, जोर जरब वसेखियां

एक एकुं कर धियावो, सरब पुन वसेखियां

खरा खोटा परख लेसी, खलक तुल बिन तोलिए

पोह बिन क्यों रंग राचो, मोक्ष गाफिल भूलिए (२)

हंस राजा मोक्ष लहै, सुकरत क्यों न करियो

मन संतोष करो, कुछ अजर भी जरियो

अजर जरियो जीव काजै, पंथ होय सुहेलहो

संसार राता फिरै गाफिल, अंत होय दुहेलहो

काया मसीति मन मुल्लाणां, सीदक एक धियाइयो

पढ किताब कुराण करणी, मोक्ष हंसा पाइयो (३)

काया रतन सरीखी, पहरलो मोमण कोई

पहर जिण करणी कीयो, गुरु म्हारो दाता सोई

दाता सोई पोह पूरो, सुर सभा पहुंचाविये

मानुष रूपी फिरे कलि मां, भेद विरला पाविये

दीन और दुनियां को साहिब, विष्णु करै सो होयसी

पारगिरांय पहुंचाय जंभराय, रतन काया देयसी (४)

घर चालो मोमणो, कलि कोयल आई

कलियर कोट तजो, पार पहुंचो भाई

पहुंचो भाई पोह पूरा, छोड़ो मन दुभांतियां

चौसल के अंबाराय, कई खड़ी बैकुंठियां

देवो दाता देऊं संदेशा, खड़ी दरगे मोमणा

उरवार निहचल कोय नाहिं, पार चालो मोमणा (५)

पारगिराय वसो, जित म्हारो सारंगपाणी

खेवट आप हरो, नरसिंह रूप विवाणी

नरसिंह रूप विवाण वस, देख जीवड़ो थरहरै

जीव जुगति पद सुध पूजा, साध मोमण ऊधरै

पांच सात नव क्रोड़ बारां, बोहड़ि नाहीं फेरवो

अजर अमर करै जंभराय, पारगिराय वसेरवो (६)