साखी-127
कलु देवजी चरित बखाण, पंदरासै तिराणियो
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कलु देवजी चरित बखाण, पंदरासै तिराणियो
बदि मंगसर नौमी दिने, संभरथल परवाणियो
संभराथल परवाण कीयो, चरित सुरां दिखाइयो
सब मोमण जीव काजै, साह चौर चिताइयो
केई चालै खड़गधार,केई चालण कूं लगे
संसार आयो कर्म पायो, चरित कीयो कलजुगे (१)
कृष्ण आयो कलि माहिं, भाग परापति पाइयो
सिंघ बकरी एकण घाट, ज्ञान सहजे गुरु पाइयो
सिंघ बकरी एक घाट पाया, देश देशा चालियो
हुकम पृथवी हुई चहुंचक, अबके मेल मिलाइयो
मन दो मन परख लेसी, संभलो गुरु भाइयो
प्रहलादजी के कवल काजे, कृष्ण कलजुग आइयो (२)
कलजुग चारूं धर्म, एकण ठांय फुरमायो
मुसल ब्रह्मा जाण, जोग जुगती बतायो
जुगत जोग की बताई, मुकति धाम तीर्थे
कागद देख्या गुरु न चीन्हा, ते न पावै ओ पंथे
छंद जांका हुवै कलि मां, अगम पंथ चलाइयो
संभराथल गुरु पंथ चाल्यो, च्यारूं धर्म फुरमाइयो (३)
पर्व न टाली म्हारा श्याम, उमाहो तेरे दीदार को
भाईड़ा सिधाए एकण धार, उमाहो जुमलै पार को
करै उमाहो पार पहुंता, माया दुःख घणेरो हो
जुग जुग तेरो कवल पूरो, ओ भरोसो तेरो हो
सत्त दे किरतार दिल मां, क्रोड़ बारां मेलियो
चरित पाखौ क्यों सहारूं, श्याम पर्व न टालियो (४)