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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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साखी-83

कांगण मेरे बाले श्रीरंग, अति रुसनाइयां

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कांगण मेरे बाले श्रीरंग, अति रुसनाइयां

वलीयड़ा तेरी बांहण सोहेदरा, देव जसोमति माइयां

बुलाय पटवा वल्या कांगण, और लाल गुवालियां

स्याही सफेदी और रंग राची, नखे नख दिखलाइय

क्रंगची की अधिक शोभा, जात वरणी न जाइय

'दीप' जप नांव हरि को , कांगण रूसनाइयां (१)

तेरो कांगणो सोहे बाला, चतुर्भुज रतन जड़ाइया

हीरा मुक्ताहल बाला, मोती मोल मंगाइया

मोल मंगाए माय हितकर, सुणो पियारे जगधणी

महला मंगलाचार गावै, रूप शोभा अति घणी

ओपमा अधिकार ओपै, नगै नग मिलाइया,

'दीप' जप नांव हरि को, कांगण रतन जड़ाइया (२)

तेरी खोलगी गृहण चतुर्भुज, अति रंग घोलिया

तेरी खोलगी राजदुलारी, जीसै मन रलिया

राज दुलहिन हंसी दिल मां, रूप त्रिभुवन मोहिया

कान कंठि कपोल कुंडल, नैन काजल सोहिया

दांत दाड़िम तीलंग रंगिया, कामणी रतनालियां

'दीप' जप नांव हरि को, डोरियां अति घोलियां (३)

किसनजी हरि जीतोजी, सखियां करी हांसी

वसुदेव को नंदन कहिये, मथुरा को है वासी

मथुरा को वासी किसन कहिए, निकट जमुना जल बहै

कान्ह होय कर गऊ चराई, किसन होय परसिद रहै

असुर संहारे काज सारे, प्रीतमां सूं प्रीतियां

'दीप' जप नांव हरि को, कृष्णजी हरि जीतिया (४)