साखी-82
लाड गोरी वर सांवलो, सिध व्याह संजोया
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लाड गोरी वर सांवलो, सिध व्याह संजोया
चोह चक आण फिराय, लगन लिख्या पण सोया
घण सोच के जद लगन लिखिया, दिन मुहूरत ठाणियां
जगराय जगमंडण करि आप, निरंजण आपो जाणियां
थारो बोल कवल न टलै, जुग जुग भंवर भारथ मोहलो
जगत जोगी देव विधाता, लाड गोरी वर सांवलो (१)
लाई आरतो मंडपै, जगै उझिग मिगइ ज्योती
वीर पचाधीण झबकै, मिलै सुर नर गोती
मिलै गोती विष्णु ज्योती, सकल कलि मां मोहेला
गुरु वृहस्पति वेद बांचै, तेतीसां के घर सोहेला
सज गरुड़ जंभराय चढ्ढो, सामैं संत बुलाइया
चांद सूरज राख मसो, आरतो ले आइया (२)
सोहै सेहरो श्रीरंग, सज गूंथ मालण ल्याई
बाजीयड़ा पांच सबद, मिल्य करत बधााई
करत बधाई मति आई, पति शुभू भेजिया
खलक मालक तखत बैठो, नव वेर दाणूं छेदिया
परमोध जप तप हुवा पूरा, ज्ञान त्रिभूवन मोहवे
तरण तारण छत्र मस्तके, सेहरो सिर सोहवे (३)
श्याम काज वडेरवो, सोहै पुण्य वता
अबके ल्योह समाहि, बारां क्रोड़ नचीता
बारां क्रोड़ि नचीत कहिये रतन सांचे ढालिया
संघण घण ज्यूं घोर बूठो, विष्णुजी के फेरवो
जूलफेकार ले चड़यो दुल दुल , श्याम काज बडेरवो (४)