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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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साखी-67

गुरु तार बाबा तूं साहेब सरब दुःख भंजन,

इस रचना का भावार्थ उपलब्ध नहीं है।

गुरु तार बाबा तूं साहेब सरब दुःख भंजन,

हम अपराधी तेरा।

गुरु तार बाबा जीवड़ो लोभी अरु लब्धी,

खूनी इण खून किया बहुतेरा।

गुरु तार बाबा मर मर गयो जनम फिर आयो,

तोउ मन न छाडी मेरा।

गुरु तार बाबा आवागवण सह्या दुःख संकट,

फेरियो अनन्त ही फेरा।

गुरु तार बाबा स्वेदज अंडज जेरज उद्भिज,

भुगति खैणि अनेरा।

गुरु तार बाबा लख चौरासी चौचक भीतर,

भरम्यो बहोली बेरा।

गुरु तार बाबा बहु दुःख सह्या शरण बिन गुरु की,

करि करि कर्म कुफेरा।

गुरु तार बाबा वैर किया वैरि उठि लागा,

मैं शरणा ताक्यो तेरा।

गुरु तार बाबा मन परच्यो पूरो गुरु पायो,

न भजूं आन अनेरा।

गुरु तार बाबा अर्ज करूं साहेबजी के आगे,

मोहि संभालो अबकी बेरा।

गुरु तार बाबा वील्ह कह वीनती गुरु आगै,

द्यो पारगिरांय बसेरा।